नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 में राजस्थान सरकार द्वारा दिये गए सुझावों में से निम्नानुसार स्वीकार किए गए हैं जिनका मैं स्वागत करता हूँ।
शिक्षा मंत्री के स्वयं के व्यक्तिगत विचार ,एव सरकार के दिये सुझाव
1. शिक्षकों को गैर शैक्षिक कार्यों (चुनाव के अलावा) में नहीं लगाना स्वागत योग्य है,जिसका सुझाव राज्य ने मजबूती से दिया था.(1/3)
2. प्री-प्राइमरी शिक्षा आंगनबाड़ी एवं विद्यालयों के माध्यम से, प्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा ही दी जाएगी।
3. RTE का दायरा जो कि 1 से 14 वर्ष का था, को बढ़ाकर 1 से 18 वर्ष तक किया गया।
4. TET परीक्षा प्राथमिक शिक्षकों के साथ, 2nd ग्रेड के शिक्षकों के लिए भी जरुरी होगी।(2/3)
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019, जो मूलत: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 पर आधारित है, के अधिकांश प्रावधान सही एवं उचित हैं।किन्तु शिक्षक भर्ती में साक्षात्कार का प्रावधान भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला सिद्ध होगा। प्रत्येक विद्यालय में विज्ञान/गणित विषय की उलब्धता के लिए कहा गया है।(1/3)
लेकिन इस हेतु वित्तीय प्रावधान करना राजस्थान जैसे बड़े राज्य के लिए संभव नहीं है।इसी प्रकार मूलभूत संरचनाओं व संसाधनों के विकास के लिए शैक्षिक एवं आर्थिक दृष्टि से पिछड़े राज्यों,जिनमें राजस्थान भी शामिल है, के लिए विशेष वित्तीय अनुदान की व्यवस्था की बहुत आवश्यकता थी,जो नहीं(2/3)
की गई है। पूर्व प्राथमिक शिक्षा राजस्थान में 37444 आंगनवाड़ी केन्द्र एवं विद्यालयों में की जानी है, इसके लिए भी केन्द्र सरकार द्वारा वित्तीय सहायता का उल्लेख नहीं किया गया है।
ऐसी स्थिति में राजस्थान में नई शिक्षा नीति को लागू किया जाना अत्यंत कठिन हो जाएगा।(3/3
5. नई शिक्षा नीति में शिक्षक स्थानांतरण नीति बनाने की बात की गई है, जिसपर हम पर कार्य कर रहे हैं।
6. कक्षा 1 से 12वीं तक शिक्षा का ढांचा 5+3+3+4 (प्री प्राइमरी से दूसरी तक 5 वर्ष, कक्षा 3 से 5 तक 3 वर्ष,कक्षा 6 से 8 तक 3 वर्ष एवं कक्षा 9 से 12 तक 4 वर्ष के कोर्स डिजाइन होंगे(3/3)
शिक्षक भर्ती में साक्षात्कार का प्रावधान भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला सिद्ध होगा- शिक्षा मंत्री
Reviewed by Sunil Doraya
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October 29, 2019
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